Our ancestor's contribution to world of  Health Science is Ayurveda.  Learn Samskrit, the language of all the books of Ayurveda.


‘Learn Samskrit – The Language of Ayurveda’  is an ‘Advanced Diploma Course' which facilitates study of Vagbhataa’s ‘Ashtangahrudayam’ in its original language; Samskritam.

Total duration of course is 2 years.

  • First year – Introductory Samskrit through communicative approach in 1st & 2nd  level and Grammar in 3rd level (examples are provided from various texts like Carakasamhita, Shushruta-Samhita, Bhavaprakasha, Madhavanidhanam & Ashtangahrudayam)

  • Second Year -  “Ashtangahrudayam” (around 1000 Slokas are dealt comprehensively)

  • Self-evaluation questions at the end of each lesson.

Eligibility criteria :

Candidate should know the devanagari lipi and should have passed Higher Secondary or equivalent level examination or age above 18 years .

Fees:  

The fees for each level is Rs 500/- Rupees Five Hundred Only


‘आयुर्वेदस्य भाषा- संस्कृतम् पठ्यताम्’ नामक उच्च प्रमाणपत्रीय  इस पाठ्यक्रम का मूल उद्देश्य आयुर्वेद के उन सभी अध्येताओं को संस्कृत भाषा से इस भांति परिचित कराना है कि वे अन्ततः आयुर्वेद के श्रीमद्वाग्भट्ट  द्वारा विरचित ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  ग्रन्थ को इसकी मूल भाषा ‘संस्कृत’ के माध्यम से स्वयं पढ़ने योग्य हो सकें।

इस पाठ्यक्रम की कुल अवधि अधिकतम दो वर्ष  है

  • संस्कृत सम्भाषण (प्रथम एवं द्वितीय पुस्तक की सामग्री) तथा व्याकरण अभ्यास हेतु तृतीय पुस्तक (‘चरकसंहिता’, ‘सुश्रुतसंहिता’, ‘भावप्रकाश’, ‘माधवनिदानम्’ एवं ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  इत्यादि ग्रन्थों के विभिन्न मूल उदाहरणों के माध्यम से) कुल अवधि एक  वर्ष  है

  • चतुर्थ पुस्तक के रूप में ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  ग्रन्थ के १००० श्लोकों का पदच्छेद, प्रत्येकपद का व्याकरण की दृष्टि से विश्लेषण, अन्वय एवञ्च प्रत्येक श्लोक का तात्पर्य इत्यादि अध्ययन हेतु एक वर्ष है ।

  • निर्माणात्मक मूल्याङ्कन-पत्र  (Formative Assessment) के द्वारा स्वयं की प्रगति का आकलन।

अर्हता      

प्रस्तुत पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु न्यूनतम अर्हता द्वादशी  अथवा तुल्य कक्षा है अथवा आयु १८ से ऊपर। देवनागरी लिपि का ज्ञान भी अपेक्षित है।

शुल्क

प्रति पाठ्यक्रम मात्र ५००/= रुपये।

courseimage

‘Learn Samskrit – The Language of Ayurveda’  is an ‘Advanced Diploma Course' which facilitates study of Vagbhataa’s ‘Ashtangahrudayam’ in its original language; Samskritam.

Total duration of course is 2 years.

  • First year – Introductory Samskrit through communicative approach in 1st & 2nd  level and Grammar in 3rd level (examples are provided from various texts like Carakasamhita, Shushruta-Samhita, Bhavaprakasha, Madhavanidhanam & Ashtangahrudayam)

  • Second Year -  “Ashtangahrudayam” (around 1000 Slokas are dealt comprehensively)

  • Self-evaluation questions at the end of each lesson.

Eligibility criteria :

Candidate should know the devanagari lipi and should have passed Higher Secondary or equivalent level examination or age above 18 years .

Fees:  

The fees for each level is Rs 500/- Rupees Five Hundred Only.


‘आयुर्वेदस्य भाषा- संस्कृतम् पठ्यताम्’ नामक उच्च प्रमाणपत्रीय  इस पाठ्यक्रम का मूल उद्देश्य आयुर्वेद के उन सभी अध्येताओं को संस्कृत भाषा से इस भांति परिचित कराना है कि वे अन्ततः आयुर्वेद के श्रीमद्वाग्भट्ट  द्वारा विरचित ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  ग्रन्थ को इसकी मूल भाषा ‘संस्कृत’ के माध्यम से स्वयं पढ़ने योग्य हो सकें।

इस पाठ्यक्रम की कुल अवधि अधिकतम दो वर्ष  है ।

  • संस्कृत सम्भाषण (प्रथम एवं द्वितीय पुस्तक की सामग्री) तथा व्याकरण अभ्यास हेतु तृतीय पुस्तक (‘चरकसंहिता’, ‘सुश्रुतसंहिता’, ‘भावप्रकाश’, ‘माधवनिदानम्’ एवं ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  इत्यादि ग्रन्थों के विभिन्न मूल उदाहरणों के माध्यम से) कुल अवधि एक  वर्ष  है

  • चतुर्थ पुस्तक के रूप में ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  ग्रन्थ के १००० श्लोकों का पदच्छेद, प्रत्येकपद का व्याकरण की दृष्टि से विश्लेषण, अन्वय एवञ्च प्रत्येक श्लोक का तात्पर्य इत्यादि अध्ययन हेतु एक वर्ष है ।

  • निर्माणात्मक मूल्याङ्कन-पत्र  (Formative Assessment) के द्वारा स्वयं की प्रगति का आकलन।

अर्हता      

प्रस्तुत पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु न्यूनतम अर्हता द्वादशी  अथवा तुल्य कक्षा है अथवा आयु १८ से ऊपर। देवनागरी लिपि का ज्ञान भी अपेक्षित है।

शुल्क

प्रति पाठ्यक्रम मात्र ५००/= रुपये।

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‘Learn Samskrit – The Language of Ayurveda’  is an ‘Advanced Diploma Course' which facilitates study of Vagbhataa’s ‘Ashtangahrudayam’ in its original language; Samskritam.

Total duration of course is 2 years.

  • First year – Introductory Samskrit through communicative approach in 1st & 2nd  level and Grammar in 3rd level (examples are provided from various texts like Carakasamhita, Shushruta-Samhita, Bhavaprakasha, Madhavanidhanam & Ashtangahrudayam)

  • Second Year -  “Ashtangahrudayam” (around 1000 Slokas are dealt comprehensively)

  • Self-evaluation questions at the end of each lesson.

Eligibility criteria :

Candidate should know the devanagari lipi and should have passed Higher Secondary or equivalent level examination or age above 18 years .

Fees:  

The fees for each level is Rs 500/- Rupees Five Hundred Only.


‘आयुर्वेदस्य भाषा- संस्कृतम् पठ्यताम्’ नामक उच्च प्रमाणपत्रीय  इस पाठ्यक्रम का मूल उद्देश्य आयुर्वेद के उन सभी अध्येताओं को संस्कृत भाषा से इस भांति परिचित कराना है कि वे अन्ततः आयुर्वेद के श्रीमद्वाग्भट्ट  द्वारा विरचित ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  ग्रन्थ को इसकी मूल भाषा ‘संस्कृत’ के माध्यम से स्वयं पढ़ने योग्य हो सकें।

इस पाठ्यक्रम की कुल अवधि अधिकतम दो वर्ष  है ।

  • संस्कृत सम्भाषण (प्रथम एवं द्वितीय पुस्तक की सामग्री) तथा व्याकरण अभ्यास हेतु तृतीय पुस्तक (‘चरकसंहिता’, ‘सुश्रुतसंहिता’, ‘भावप्रकाश’, ‘माधवनिदानम्’ एवं ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  इत्यादि ग्रन्थों के विभिन्न मूल उदाहरणों के माध्यम से) कुल अवधि एक  वर्ष  है

  • चतुर्थ पुस्तक के रूप में ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  ग्रन्थ के १००० श्लोकों का पदच्छेद, प्रत्येकपद का व्याकरण की दृष्टि से विश्लेषण, अन्वय एवञ्च प्रत्येक श्लोक का तात्पर्य इत्यादि अध्ययन हेतु एक वर्ष है ।

  • निर्माणात्मक मूल्याङ्कन-पत्र  (Formative Assessment) के द्वारा स्वयं की प्रगति का आकलन।

अर्हता      

प्रस्तुत पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु न्यूनतम अर्हता द्वादशी  अथवा तुल्य कक्षा है अथवा आयु १८ से ऊपर। देवनागरी लिपि का ज्ञान भी अपेक्षित है।

शुल्क

प्रति पाठ्यक्रम मात्र ५००/= रुपये।



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‘Learn Samskrit – The Language of Ayurveda’  is an ‘Advanced Diploma Course' which facilitates study of Vagbhataa’s ‘Ashtangahrudayam’ in its original language; Samskritam.

Total duration of course is 2 years.

  • First year – Introductory Samskrit through communicative approach in 1st & 2nd  level and Grammar in 3rd level (examples are provided from various texts like Carakasamhita, Shushruta-Samhita, Bhavaprakasha, Madhavanidhanam & Ashtangahrudayam)

  • Second Year -  “Ashtangahrudayam” (around 1000 Slokas are dealt comprehensively)

  • Self-evaluation questions at the end of each lesson.

Eligibility criteria :

Candidate should know the devanagari lipi and should have passed Higher Secondary or equivalent level examination or age above 18 years .

Fees:  

The fees for each level is Rs 500/- Rupees Five Hundred Only.


‘आयुर्वेदस्य भाषा- संस्कृतम् पठ्यताम्’ नामक उच्च प्रमाणपत्रीय  इस पाठ्यक्रम का मूल उद्देश्य आयुर्वेद के उन सभी अध्येताओं को संस्कृत भाषा से इस भांति परिचित कराना है कि वे अन्ततः आयुर्वेद के श्रीमद्वाग्भट्ट  द्वारा विरचित ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  ग्रन्थ को इसकी मूल भाषा ‘संस्कृत’ के माध्यम से स्वयं पढ़ने योग्य हो सकें।

इस पाठ्यक्रम की कुल अवधि अधिकतम दो वर्ष  है ।

  • संस्कृत सम्भाषण (प्रथम एवं द्वितीय पुस्तक की सामग्री) तथा व्याकरण अभ्यास हेतु तृतीय पुस्तक (‘चरकसंहिता’, ‘सुश्रुतसंहिता’, ‘भावप्रकाश’, ‘माधवनिदानम्’ एवं ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  इत्यादि ग्रन्थों के विभिन्न मूल उदाहरणों के माध्यम से) कुल अवधि एक  वर्ष  है

  • चतुर्थ पुस्तक के रूप में ‘अष्टाङ्गहृदयम्’  ग्रन्थ के १००० श्लोकों का पदच्छेद, प्रत्येकपद का व्याकरण की दृष्टि से विश्लेषण, अन्वय एवञ्च प्रत्येक श्लोक का तात्पर्य इत्यादि अध्ययन हेतु एक वर्ष है ।

  • निर्माणात्मक मूल्याङ्कन-पत्र  (Formative Assessment) के द्वारा स्वयं की प्रगति का आकलन।

अर्हता      

प्रस्तुत पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु न्यूनतम अर्हता द्वादशी  अथवा तुल्य कक्षा है अथवा आयु १८ से ऊपर। देवनागरी लिपि का ज्ञान भी अपेक्षित है।

शुल्क

प्रति पाठ्यक्रम मात्र ५००/= रुपये।


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